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खोज: एनआईटी रायपुर में सिरियम ऑक्साइड माइक्रोट्यूब्स (CeO₂-MT) की निर्माण पद्धति का

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आविष्कार पेटेंट किया गया

रायपुर, छत्तीसगढ़:22/02/2025 — राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के शोधकर्ताओं ने सिरियम ऑक्साइड माइक्रोट्यूब्स (CeO₂-MT) बनाने का एक नया तरीका विकसित करते हुए एक नई उपलब्धि हासिल की है। इसे हाल ही में भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा पेटेंट संख्या 558899 के रूप में आधिकारिक रूप से 28 जनवरी 2025 को खोजकर्ताओं श्री दिलीप कुमार चन्द्रा, डॉ. चिन्मय महापात्रा, और डॉ. अवनीश कुमार को प्रदान किया गया है। इसका उपयोग विभिन्न जटिल औषधियों के शरीर में कुशल वितरण, क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत, और नए अंगों के प्रत्यारोपण जैसी चिकित्सा के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण संभावनाओं को उजागर करता है।

यह अग्रणी कार्य श्री दिलीप कुमार चन्द्रा द्वारा किया गया है, जो 2022 में एनआईटी रायपुर में पीएचडी शोधार्थी के रूप में डॉ. चिन्मय महापात्रा और डॉ. अवनीश कुमार के कुशल मार्गदर्शन में संभव हुआ है। श्री चन्द्रा एनआईटी रायपुर के नियमित कर्मचारी भी हैं और उन्होंने अनुसंधान और संस्थान के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हुए अब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त SCI और स्कोपस इंडेक्स जर्नल्स में 8 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं।

सिरियम ऑक्साइड माइक्रोट्यूब्स क्या हैं? सेरियम ऑक्साइड माइक्रोट्यूब्स बेहद छोटे, नली के आकार के पदार्थ होते हैं, जो सिरियम ऑक्साइड (CeO₂) से बने होते हैं। इसे आप बेहद पतली स्ट्रॉ की तरह समझ सकते हैं, जो मानव बाल से 400 गुना पतली होती है। इसकी खोखली और छिद्रयुक्त संरचना इसे चिकित्सा क्षेत्र में अत्यधिक उपयोगी बनाती है।

ये कैसे बनाए जाते हैं? इसका निर्माण सरल और प्रभावी है:-
1. आधार सामग्री निर्माण: पहले पॉलीकैप्रोलैक्टोन (PCL) नैनोफाइबर का एक अस्थायी ढांचा तैयार किया गया। 2. लेपन: फिर इन फाइबर्स के ढांचे पर सिरियम ऑक्साइड की परत चढ़ाई गई। 3. तापन: फिर इन लेपित फाइबर्स को 440°C तापमान पर 5 घंटे तक गर्म किया गया, जिससे PCL के ढांचे जल गए और खोखले सिरियम ऑक्साइड माइक्रोट्यूब्स बन गए।

ये कैसे दिखते हैं?-
ये ट्यूब्स लगभग 280 नैनोमीटर चौड़े होते हैं। इनकी संरचना की पुष्टि एक्स-रे विवर्तन (XRD) और इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी जैसी उन्नत तकनीकों से की जाती है। क्या ये कोशिकाओं के लिए सुरक्षित हैं? (साइटोकंपैटिबिलिटी अध्ययन) शोधकर्ताओं ने इन माइक्रोट्यूब्स को चूहे की मांसपेशी कोशिकाओं (C2C12) पर परीक्षण किया और पाया: • कोशिका के अनुकूल: ये कोशिकाओं के लिए हानिकारक नहीं हैं। • तनाव से सुरक्षा: ये कोशिकाओं को रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज (ROS) जैसे हानिकारक अणुओं से बचाते हैं। यहां तक कि हाइड्रोजन पेरोक्साइड के उच्च स्तर पर भी कोशिकाएं स्वस्थ रहीं।

वास्तविक जीवन में उपयोगिता:-
1. ऊतक अभियांत्रिकी (Tissue engineering): नई मांसपेशी और तंत्रिका कोशिकाओं के विकास में मदद
करता है, जो चोटों के इलाज में उपयोगी है। 2. एंटीऑक्सिडेंट थेरेपी: तनाव से होने वाले कोशिका नुकसान को कम करता है, जैसे फलों में पाए जाने वाले एंटीऑक्सिडेंट हमारे शरीर की रक्षा करते हैं। 3. औषधि वितरण: दवाओं को सही जगह पर पहुंचाने में मदद करता है, जैसे एक छोटा डिलीवरी ट्रक। 4. रक्त वाहिका मरम्मत: इसकी ट्यूब जैसी संरचना छोटी रक्त वाहिकाओं के समान होती है, जो उन्हें सुधारने में मदद करती है।

मुख्य विशेषताएं:-
• नई प्रक्रिया: इलेक्ट्रोस्पिनिंग और हीटिंग द्वारा तेज और प्रभावी निर्माण प्रक्रिया। • कोशिका सुरक्षा: ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में उत्कृष्ट, जिससे मांसपेशी कोशिकाएं स्वस्थ रहती हैं। • विविध उपयोग: दवा वितरण, क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत, और चिकित्सा में नए अंगों के प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त।

रोजमर्रा के फायदे:- • तेज घाव भरना: मांसपेशियों की चोटों से जल्दी ठीक होने में मदद करता है। • बेहतर दवाएं: दवाओं को लक्षित क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से पहुंचाता है। • सुरक्षित प्रत्यारोपण ‎: चिकित्सकीय प्रत्यारोपण को शरीर के अनुकूल बनाता है। • क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत: नई ऊतक वृद्धि को समर्थन देता है, जो सर्जरी और चोट से उबरने में मददगार है।

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